
बात अलग है खाटू वाले श्याम तेरे दरबार की
बात अलग है खाटू वाले,
श्याम तेरे दरबार की,
आदत सी है इन अँखियों को,
श्याम तेरे दीदार की।।
शीश मुकुट पे मोर की पंखिया,
जादूगरी है श्याम तेरी अँखियाँ,
चमक अनोखी श्याम तेरे इस,
गल वैजन्ती हार की,
मोरछड़ी जो तेरी लहराए,
लगता यूँ चलती हो पावन हवाएं,
खुशियां भरी है तेरे दामन में,
इस सारे संसार की,
ऊँची अटारी बैठा मुरारी,
झोली भरे सबकी ये बारी बारी,
‘गोलू’ श्याम की राहें है बस,
जीवन के उद्धार की,
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