
बाबा आओ तो मनड़े री बात कर ल्यूँ
बाबा आओ तो,
मनड़े री बात कर ल्यूँ।
दोहा – बाटड़ल्या थारी जोवति,
म्हारी आंखड़ल्या दिन रात,
आवो म्हारा सांवरा,
तो कोई करल्या मनड़े री बात।
थारे चरणा में नैणा सु,
बरसात कर ल्यूँ,
आजा रे आजा रे सांवरिया,
थाने आया सरसी,
मनड़े री प्यास तो,
बुझाया सरसी।।
तर्ज – पिया आओ तो।
श्याम धणी थारी,
ओल्यू घणी आवे,
पागल मन ने,
कुण समझावे,
आंख्या म्हारी नीर बहावे,
मनड़ो तो म्हारो धीर ना लावे,
मोती सीप सो,
थाको म्हाको साथ कर ल्यूं,
सांवरा आजा,
या तू बुला ले,
चरणा री दासी,
मन्ने बना ले,
सेवा में बाबा इब तो लगा ले,
अर्ज करूँ मैं शरण बसा ले,
फूल खुशबु सो,
विरह में बाबा,
मर नहीं जाऊं मैं,
थारे सिवा और,
कुण ने बुलाऊँ मैं,
‘चोखानी’ जाणे जी नहीं पाऊं मैं,
था बिन कुण ने दुखड़ो सुनाऊँ मैं,
केवे ‘केमिता’ भी,
स्वर – केमिता जी राठौड़।
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