
बाबा डावा हाथ में थी भालो जेलियो,
हरजी भाटी बोलिया,
और सुन बाबा म्हारी बात,
मीणो दिनों थारा भक्त ने,
लाज रखो किरतार,
रुनेजे वाला लाज रखो किरतार।
जीमना में घोड़े री लगाम,
बाबा हरजी बुलावे थी वेगा पधारो,
सुनजो थी रूनीजा रा श्याम,
हमी इंद्र देवता म्हारी अर्ज सांभलो,
हमी आप आया सब काज सरे,
गाया वाली बेल पधारो,
तिरछी गाया भूखे मरे।।
बाबा ज्येठ महीने पवन घणो वाजे,
पड़े तावड़ो धरती तपे,
बाबा सात सरेया रा,
नीर सुखोना नव खंड में झंकार पड़े।।
बाबा अषाढ़ महीने अलख थोरी,
आशा कर्षा हुआ खरे मते,
बाबा धोरे धोरे मोट बाजरी,
डेले डेले ज्वार वले।।
बाबा सावन महीने सुरंगों गाजे,
सूखा सरवर फेर भरे,
हमी दादुर मोर पपैय्या बोले,
आठु पोर आवाज करे।।
बाबा भाद्रवा में भली कर आवो,
मुसलाधारा मेह वरे,
बाबा नदिया नाला आवे सोगना,
गाया हरियो घास चारे।।
बाबा अशोज महीने अम्रत मेहुड़ा,
अमी फवारा री साट पड़े,
बाबा सिप सायरा में मोती निपजे,
समुन्द्र जाए सगाल करे।।
बाबा काती महीने लोह लावणी,
आये शक्ति माँ हाथ धरे,
अन धन पीरा होवे सोगना,
कण सु कोटार भरे।।
बाबा हरजी बेले रामा पीर पधारिया,
लीले घोड़े हिस करे,
बाबा हरी शरणा में भाटी हरजी रे,
बोले भावतजिया भगवान मिले।।
गायक – श्याम पालीवाल जी।
भजन प्रेषक – श्रवण सिंह राजपुरोहित।
सम्पर्क – +91 90965 58244
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