
नंदी पे चली है बारात भोले की
सबसे अलग है यो बात भोले की
अरे शूकर नाचे शनिचर नाचे
संग में भूत पुशाचर नाचे
देख ले तू गोरां यो ठाठ भोले की
चले हैं शिव जैसे मस्ट मलंगा
गले में सर्प जटा में गंगा
हाथ में डम डम डमरू बाजे
माथे चंदा कितना साजे
आज दिन है भोले का
और रात भोले की
नंदी पे चली……
गोरां नगरी थर थर काँपे
भूत पिशाचर देख झाँके
गले में है नर मुंडों की माला
शोर मचावे अजब निराला
तू जीत है गोरा
तू मात भोले की
नंदी पे चली है……
फेरों पर जब आयी गोरा
शरमाए देखो कैसे भोला
सात फेरे संग लगाके
वर माला ली सर को झुका के
हो गई है गोरां
देखो आज भोले की
फूल देखो गगन से बरसे
देवता सब उतरे स्वर्ग से
शिव मिलन की बेला आयी
देने आये सब शिव को बधाई
कलम प्रकाश की और बात भोले की
ख़ुशी गाती है महिमा दिन रात भोले की
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