
बार बार मैं तुम्हे पुकारूँ,
सुनलो लखदातार,
नैया हमारी श्याम,
आके लगाओ पार,
तर्ज – बार बार तुझे क्या समझाए।
सुना है मैने श्याम बड़े तुम दानी हो,
ऐसा सुंदर रूप बड़े तुम शानी हो,
तन केसरिया बागो सोहे,
कैसा है श्रृंगार,
अहिलवती के लाल माया तेरी न्यारी है,
पुरो मन की आस भरोसो भारी है,
अद बीच नैया डूब रही है,
पार करो करतार,
‘आलूसिंह जी’ भक्त बड़े ताप धारी है,
चरण नवावे शीश ये दुनिया सारी है,
केसर तिलक लगावे थारे,
करे अजब श्रृंगार,
‘बंसीधर’ कर जोड़ चरण शीश नावे है,
तेरी कृपा घनश्याम यो हरदम चावे है,
चरण कमल को लियो आसरो,
तेरो ही आधार,
स्वर – मुकेश बागड़ा जी।
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