
बिना राधा है आधा घनश्याम संवारे
कृष्णा करो बरतो है राधा छाव रे
कान्हा मुरलिया तो जब जब बजाए सुरसा तो सरगम के राधे राधे गाये,
दो तन जुदा है फिर भी प्राण इक कहाए
माझी बने जो मोहन राधा ओ नाम रे
जब भी किशोरी की अखियाँ ये फडके
सीने में सांस बन के श्याम नाम धडके
पागल हुआ ये मन सदा देखो तडपे
प्रीत के आगे फीके पड़े सारे दाव रे
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