
राम सिया राम सिया राम सिया राम,
बोलो राम सिया राम सिया राम,
मेरे मन मंदिर में जबसे सीता राम पधारे,
टूट गये है तबसे बंधन इस दुनिया के सारे,
बोलो राम सिया राम सिया राम सिया राम,
रोम रोम सिया राम नाम की फेर रहा है माला,
बूँद बूँद कर छलक उठा है भक्ति रस का प्याला,
ओ रोम रोम सिया राम नाम की फेर रहा है माला,
दर्शन देते सिया रामजी निसदिन सांझ सकारे,
अंग अंग में ज्ञान का दीपक प्रभु ने ही प्रकटाया,
तन को अवधपुरी के जैसा पावन धाम बनाया,
ओ अंग अंग में ज्ञान का दीपक प्रभु ने ही प्रकटाया,
अपनी शरण में लेके प्रभु ने मेरे भाग्य संवारे,
हर धड़कन के संग बजाकर साँसों का इक तारा,
राम नाम गुण गाता फिरता प्राण का ये बंजारा,
ओ हर धड़कन के संग बजाकर साँसों का इक तारा,
असमन की सरयू जल धारा प्रभु के चरण पखारे,
ओ मेरे मन मंदिर में जबसे सीता राम पधारे,
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