
हो भक्ति के रंग में रंग दे जीवन,
ओ मेरे रघुनन्दन,
पल भी न बिसराऊ तुझको निसदिन कर लूँ चिंतन,
निसदिन कर लूँ चिंतन,
भक्ति के रंग में रंग दे जीवन,
प्रवास में संग रामभक्ति हो तो यात्रा कहलाये,
भोजन में हो भक्ति शामिल वो प्रसाद बन जाए,
भक्ति के गंगाजल से ये तनमन कर दे पावन,
तनमन कर दे पावन,
ओ भक्ति के रंग में रंग दे जीवन,
श्रम से मिलन हो रामभक्ति का वो श्रम यज्ञ कहावे,
निराहार उपवास बने जब भक्ति का रस घुल जाये,
भक्ति के फूलों से भर दे मेरे मन का उपवन,
मेरे मन का उपवन,
जिस आवास में राम बसें हो वो मंदिर बन जाये,
पत्थर भी श्री राम नाम के कारण ही तर पाए,
रामभक्ति से जोड़ लूँ नाता तोड़के सारे बंधन,
तोड़के सारे बंधन,
याद में रामभक्ति जलसिंचन निज आनंद दिलवाये,
जीव बने श्रीराम में तनमय उनमें जाये समाये,
मुक्ति का पथ दिखलाना हे दशरथ के नंदन,
हे दशरथ के नंदन,
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