
भक्त रहे ना पहले जैसे
भक्त रहे ना पहले जैसे, श्याम को कौन बनाए गा ।
खाटू वाला नीले चढ़कर किसके खातिर आएगा ।।
किसकी सुनेगा बात भला अब कौन भला अब बोलेगा,
मोरछड़ी से बंद तालों को कौन भला अब खोलेगा ।
श्याम बहादुर जी के जैसा दूजा ना मिल पाएगा,
ढूंढे लेकिन भाव मिले ना बाबा तेरे कीर्तन में,
अपने अपने नाम का लालच लेकर बैठे हैं मन में ।
श्याम अखाड़ा आलू सिंह जी जैसा कौन लगाएगा,
शिवचरण जी के भावों में श्याम धणी खो जाते थे,
हाथ पकड़कर हर अक्षर को दीनानाथ दिखाते थे ।
भजनों की अनमोल यह माला कैसे कृष्ण चलाएगा,
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