
भजमन राधे गोविन्दम,
राधे राधे राधे गोविन्दम।।
तर्ज – हर हर शम्भू।
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी,
हे नाथ नारायण वासुदेवा,
पितु मात स्वामी सखा हमारे,
बंदी गृह के तुम अवतारी,
कहीं जन्मे कहीं पले मुरारी,
गोकुल में चमके मथुरा के तारे,
गीता में उपदेश सुनाया,
धर्म युद्ध को धर्म बताया,
अमर है गीता के बोल सारे,
अधर पे बंशी ह्रदय में राधे,
बट गए दोनों में आधे आधे,
हे राधा नागर हे भक्त वत्सल,
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