
भाई गुरु चरणों में चाल थारी मिट जा माया जाल
भाई गुरु चरणों में चाल,
थारी मिट जा माया जाल,
कष्ट हरे दया करे,
ऐसे दीनदयाल,
आशिर्वाद की अमुल्य दौलत,
कर दे मालामाल,
गुरु चरणा में म़नसु पुजो,
कोई और दयालु नहीं दुजो,
लोक ओर परलोक सुधार्या,
है आदि अनादि गुरूदेवा,
ब्रम्हा विष्णु शिव करे सेवा,
मन का पुष्प चढ़ा करके,
तु गुरूगम गेले चाल,
अभिमान त्याग दे रे भाया,
तर पाचों तन की ये काया,
गुरूदेव सतमार्ग दिखावे,
सतसंग साधे काज,
है अमर गुरासा रो सरणो,
गुरु आज्ञा रो पालन करणो,
गुरूदेव कहे सुधर ‘ओंकारा’,
सिधे गेले चाल,
गायक – देव शर्मा, आमा।
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