
भावना तो भक्ति है भावना बलवान है
भावना तो भक्ति है,
भावना बलवान है,
भावना से खेल ना रे,
भावना भगवान है,
भावना से राम चौदह,
साल जंगल में रहे,
भावनावश कृष्ण राधे,
रानी के वश में रहे,
भावना से लिप्त होते,
भक्तिमय हनुमान है,
भाव से बढ़कर जहाँ में,
दूजी ना सौगात है,
भावना से खेल करना,
दुष्ट की औकात है,
भावना से खेलता वो,
आदमी शैतान है,
भावना ही कौरवों के,
नाश का कारण बनी,
वाल्मीकि की कलम से,
देखो रामायण बनी,
भावना के बिन अधूरा,
हर कोई इंसान है,
जैसी तेरी भावना है,
वैसा तू फल पाएगा,
‘हर्ष’ कांटे बोएगा तो,
कैसे कलियाँ पाएगा,
आदमी की जिंदगी में,
भावना प्रधान है,
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