
भेरूजी थारा द्वार पे,
आयो हूँ दुखड़ा टार दे,
कंकाली रा लाल भेरू जी,
ऊबो थारे बारणे,
जेठ मास थारो जागण वेला,
सब जातरी द्वार पे वेला,
ऐ मैं तो जागण देऊ सारी रात ने,
द्वार-द्वार मैं गयो रे भेरूजी,
कोई न हेलो सुणियो भेरू जी,
ओ मारा शिशोदा सरकार ने,
ढोल नगाड़ा नोपत बाजे,
खम्मा खम्मा मारा भेरूजी नाचे,
ओ मारी विपदा देवो टार ने,
गावे जावे हेले आवे,
धरम तंवर थारा भजन सुनावे,
ओ भेरू बेगा आवो पाट पे,
गायक / लेखक – धर्मेंद्र तंवर उदयपुर।
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