
अरे रे तेरे खेल निराले,
भेरू जी नाकोड़ा वाले,
कलयुग में दादा मशहूर तू,
सच्चा है तू सच्चा तेरा दरबार,
दीन दुखियों का तू ही दातार,
अजब अनोखे है तेरे चमत्कार,
हो रही जग में तेरी जय जयकार,
अ र र तेरे खेल निराले,
तर्ज – अर र मेरी जान है राधा।
हरपल चमत्कार करता है तू,
भक्तो के संकट को हरता है तू,
सबकी मुरादे पूरी करता है तू,
बिन मांगे झोलियाँ भरता है तू,
पल में पलट जाये किस्मत की रेख,
एक बार नाकोड़ा धाम आके तो देख,
एक नही लाखो की बनी तकदीर,
‘दिलबर’ ‘सूरज’ कहे हरे सबकी पीर,
गायक – सूरज राठौर सुमेरपुर।
रचनाकार – दिलीप सिंह सिसोदिया ‘दिलबर’।
नागदा जक्शन म.प्र. 9907023365
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