
भोले जी मोहे ले चल अपने धाम,
जहां बिराजे गौरा रानी और गजानंद सरकार,
शिव भोले के जटा बिराजे,
उनकी जटा से बहती रहती निर्मल गंगा धार,
गले भोले के मुंडो की माला,
उनके गले में लिपटा रहता विषधर काला नाग,
हाथ भोले के कमंडल सोहै,
उनके हाथ में डमरू बजता नाच रहा संसार,
पाव भोले के खड़ाऊ बिराजे,
उनके पैरों में बजती रहती घुंघरू की झंकार,
संग भोले के नंदी सोहै,
बाएं अंग में गोरा सोहै,
उनकी गोदी में बैठे हैं गजानंद सरकार,
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