
भोले देने वाले हैं, हम लेने वाले हैं
द्वार, ख़ाली हाथ नहीं जाना
जिसे चाहिए
, वो कावड़ उठाना, उठाना,
जिसे चाहिए, वो कावड़ उठाना
( जिसे चाहिए, वो कावड़ उठाना, उठाना,
भोले देने वाले हैं,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
रोज़ रोज़ मांगने की, आदत ही छोड़ दो
जिस को जितना चाहिए, वो भोले से बोल दो
^सावन का महीना है, कावड़ का महीना है
कावड़ियो न, शर्माना,
मीलों मील चलके जो, द्वारे पे आता
सदा डमरु वाले को, कावड़िया भाता
^कावड़ ले के जाना है, झोली भरके आना है
थोड़ा सा, कष्ट उठाना,
हाथ मे ना आए तो, झोली पसार ले
खुल्ला खज़ाना है, भोले के द्वार पे
^झोली भर जाए तो, काम बन जाए तो
कावड़ियो, बोल बम गाना,
छोटी बड़ी कावड़ का, मोल नहीं आंकते
भक्तों की भक्ति के, भाव को है मानते
^भोले को मनाना है, गंगा जल लाना है
*मौका यह, चूक नहीं जाना,
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