
मईया तेरी चुनरी जब जब लहराती है
धुन- रातों को उठ उठ के
जब जब, लहराती है, जब जब, लहराती है ॥
भक्तों को, दीवाना कर ॥ ये नाच, नचाती है ॥
मईया, तेरी चुनरी, जब जब...
तारों, जड़ी चुनरी, माँ चम चम चमके है ॥
इस की, बूटी बूटी, में हीरा दमके है ॥
तूँ, ओढ़ दिखा दे माँ ॥ क्यों, इतना सताती है ॥
तुम ही, बनाती हो, तुम ही मिटाती हो ॥
आए, कोई तूफ़ान तो, तूँ सिंह चढ़ आती हो ॥
आँचल में, छुपा के तुम ॥ गोदी में, सुलाती हो ॥
पैरों में, हैं कांटे, बड़ी गहरी खाई है ॥
कैसे, बताऊँ माँ, बड़ी बिपदा आई है ॥
बिन, बोले ही माँ तूँ ॥ आँसू, पोंछ जाती है ॥
तेरी, लाल चुनरिया माँ, मेरे मन को भाती है ॥
जब, धूप लगी हो तो, यह छाँव बन जाती है ॥
भक्तों के, दिल का यह ॥ चैन चुराती है ॥
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