
मइया पिंगहां झूलती
(शेरांवाली की जय, मेहरांवाली की जय,
जोतांवाली की जय, लाटांवाली की जय ॥)
झूलें, कंजकाओं के साथ ॥
हाथों में, लाल चूड़ियां,
सिर पर, चुन्नी है लाल।
हाथों में, माँ के, सच्चा चूड़ा।
फूलों से, सजाया चूड़ा ॥
साड़ी का रंग, सुर्ख गाढ़ा ॥
लगे, लाल गुलाल,
दाती पिंगहां... अम्बे पिंगहां...
ब्रह्मा, विष्णु, फूल बरसाते।
शंकर, जी, त्रिशूल घुमाते ॥
देव, लोक में, नाचते गाते ॥
मचती, देखो धमाल,
पारबती माँ, देती हुल्लारा।
गूंजे, धरती, अम्बर सारा ॥
धर्मराज का, महल मुनारा ॥
होता, सब निहाल,
सारे, अद्भुत, नज़ारे देखते।
चांद और, सूरज, ठहर-ठहर देखते ॥
मात लोक में, गिद्धे लगाते ॥
खेलती, सुर संग ताल,
महक के संग, पर्वत भर गए।
स्वयं, देवता, माँ के तर गए ॥
शिवी जैसे, शौकीन भी तर गए ॥
कर्मा, करते कमाल,
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