
मजधारा मैं छोडके नायीया ओ मेरे लक्ष्मण भैया तुम्हे क्या हो गया है
चाल मझधार में छोड़ के नैया,
ओ मेरे लक्ष्मण भैया तुम्हें क्या हो गया है
वन में अकेली लकड़ी कैसे जलेगी लक्ष्मण भैया रे
सूर्य ऊगने को आए अभी नहीं आए बजरंग बाला रे
मेरी किस्मत टूटी फूटी ओ भी कहां जा बैठी
तुम्हें क्या हो गया है
मझधार में छोड़ के नैया ओ मेरे लक्ष्मण भैया
अयोध्या में भरत रोवे लंका में रोवे सीता नारी रे
मैं तो यहां रोए देख मुरझाए कृपा तेरी रे
वानर दल सब शौक मनाए दुश्मन खुशी मनाए
कैकैई कौशल्या सुमित्रा रोएगी ओ तीनो मैया रे
पूछेगी हमसे वो क्यों नहीं आए लक्ष्मण भैया रे
होगा झगड़ा करेगी दुखड़ा कैसे बताएं मुखड़ा
कहते हैं गंगादास। दिया भाई ने धोखा रे
अरे ओ लक्ष्मण भैया तुमने लिया ए मौका रे
वन वन फिरना पिता का मरना सती सिया का हरना
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.

