
मनमोहन कब आओगे अखियां तरस रही कब दरस दिखाओगे......
मेरे हाथों में कलसा है
चलो सखी वन को चले, जहां राम जी का जलसा है,
मेरे मोहन कब आओगे, मनमोहन कब आओगे.....
मेरे हाथ में केला है,
चलो सखी वन को चले, जहां राम जी का मेला है,
मेरे हाथ में गीता है,
चलो सखी वन को चले, जहां राम जी की सीता है,
मेरे हाथ में तख्ती है,
चलो सखी वन को चले, जहां राम जी की शक्ति है,
मेरे हाथ में पेठा है,
सीता जी को ब्याहने चला श्री दशरथ का बेटा है,
मेरे हाथ में इमली है,
जनक के हल के तले सीता जी निकली हैं,
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