
मनमोहन तुम रूठ गए तो कौन मेरा जग में
मनमोहन तुम रूठ गए तो,
कौन मेरा जग में,
कान्हा कौन मेरा जग में,
साथ रहे हो अब ना रहा तो,
ज़िंदगी का कारवाँ,
रुकता नहीं है,
दिल है श्याम तुम बिन,
धड़कता नहीं है,
चलने से पहले मैं गिर गया तो,
तुम्हे क्या नहीं खबर,
सब कुछ पता है,
दिल ये दर्द मेरा,
हद से गुज़रता है,
मिलने से पहले बिछड़ गया तो,
ग़म के मेले में कैसे,
मुलाकातें हो,
मेरे इश्क़ की,
आखिरी साँसे हो,
जीने से पहले मन मर गया तो,
मिलने का रोग,
जो तुमसे लगा है,
छलिया ना तुम छलो,
ये दास तेरा है,
दर्शन से पहले भटक गया तो,
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