
मनवा ले सतगुरु की शरण तिरण रो अवसर आयो रे
मनवा ले सतगुरु की शरण,
तिरण रो अवसर आयो रे।।
शुभ कर्मा से मनुष्य तन पायो,
अजब सोच मन में नहीं लायो,
बनकर आयो बिंद,
नींद में कैसे सुतो रे,
जो जीव अपनी मुक्ति चाहो,
दसदोस ने दूर हटाओ,
पानी पहली पाल बांध ले,
गाफिल कई सुतो रे,
चोरी जारी जीव और हत्या,
निन्दा गाली मिथ्या ओर पतिया,
हर्ष शोक अभिमान,
ई दस मत लाये रे,
राजा रावण और शिशुपाला,
पकड़ कंठ बाणासुर मारा,
ऐसा ऐसा भूप हुआ धरती पर,
जारो पत्तों नी पायो रे,
ये दिन तेरा बीत जाएगा,
फिर चोरियासी में गोता खावेगा,
पकड़ सांच तज झूठ,
मारग थने सीधो बतायो रे,
रामानंद गुरु साची रे केवे,
जाग जीव थने हेला रे देवें,
कहे कबीर विचार मनक,
तन मुश्किल पायो रे,
गायक – गोपाल दास वैष्णव।
प्रेषक – शुभम लोहार।
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