
मनुष्य तू बडा महान है,
धरती की शान तू है,
मनु की संतान,
तेरी मुठ्ठियों मे बंद तूफान है रे,
भूल मत मनुष्य,
तू बडा़ महान है।।
तू जो चाहे पर्वत पहाडो को फोड दे,
तू जो चाहे नदियों के मुख को भी मोड दे,
तू जो चाहे माटी से अमृत निचोड़ दे,
तू जो चाहे धरती को अंबर से जोड दे,
अमर तेरे प्राण अमर तेरे प्राण,
मिला तुझको वरदान,
तेरी आत्मा मे स्वयं भगवान है,
तेरी आत्मा मे स्वयं भगवान है रे,
भूल मत तू बड़ा महान है।।
नैनो मे ज्वाल तेरी गत मे भुचाल,
तेरी छाती मे छुपा महाकाल है,
पृथ्वी के लाल तेरी हिमगिरि सा भाग,
तेरी भ्रकुटी मे तांडव का ताल है,
निज को तू जान निज को तू जान,
जरा शक्ति पहचान,
तेरी वाणी में ओ तेरी वाणी मे,
युग का अहवान है रे,
धरती सा भी तू है अग्नि सा भी,
तू जो चाहे काल को भी थाम ले,
पापो का प्रलय रूके पशुता का शिश झुके,
तू जो चाहे हिम्मत से काम ले,
गुरू सा मतीमान गुरू सा मतीमान,
पवन सा गतीमान,
तेरी नभ से भी ऊंची उडान है,
ओ तेरी नब से भी ऊंची उडान है रे,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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