
मन का मीत
ओ बाबा....
ओ बाबा तुमसे नहीं है कोई शिकवा गिला,
मुझको जो कुछ मिला तेरे दर से मिला,
ओ बाबा तुमसे नहीं है....
बन के मन का मीत मेरे मुझको मिला तू,
तुमने पोंछ डाले मेरी अँखियो के आंसू,
ओ बाबा सर पे हाथ धार के दिया मुझे हौंसला,
रूठा ज़माना एक तू ही नहीं रूठा,
मुझसे है बाबा तेरा दर नहीं छूटा,
ओ बाबा दर तेरे आने का ना टूटा सिलसिला,
रोमी को तेरे रहते कुछ ना कमी है,
बड़ी मौज से कटरही ज़िन्दगी है,
ओ बाबा भक्ति का तेरी पाया ऐसा सिला,
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