
मन की मिटेगी तृष्णा
मन की मिटेगी तृष्णा, भज ले तू गोपाल कृष्णा.....
वो ही घट के अंदर बैठा वो ही चहूँ और है,
वो ही पतझर वो ही सावन, साँझ वहीं वो भोर है,
वो ही कर्ता वो ही कर्म है ,कितना कमाल कृष्णा.....
तेरे सर पे सुख की छाया केवल वहीं कर सकता है,
तेरे मन के सूनेपन को केवल वहीं भर सकता है,
तुझको गिरने से पहले ही लेगा सम्भाल कृष्णा.....
गोबिंद माधव कृष्ण मुरारी चाहे कोई नाम लो,
बंसी वाला वो मनमोहन दामन उसका थाम लो,
शरणागत जो होते उनका रखता ख्याल कृष्णा......
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