
मन मेल को धोया नहीं चेतावनी
मन मेल को धोया नहीं,
दिल दाग धोया नही ।
नहाया तीर्थ तो क्या हुआ,
क्या हुआ क्या हुआ ।।
काम किया संसार का,
ठग जेसे बजार का ।
आयो तीर्थ कर के द्वारका,
छापा दिया क्या हुआ ।।
कुत्ता हुआ हमाल का,
तुने धंधा किया कंगाल का ।
तेरा हिरदा भया है चांडाल का,
कासी गया तो क्या हुआ ।।
जोगी जती होकर भला,
कपड़ा पेरे वो गेरवा ।
पाया नही रे ऐ परमात्मा,
जोगीं हुआ तो क्या हुआ ।।
पंडित पोथी बचाता,
भाग्य का भेद खोलता ।
अपना करम तो बाचा नही,
पंडित हुआ तो क्या हुआ ।।
काजी तु कलमा छोड़ के,
देता ना सीक कीसी ओर को ।
कुछ अपने तन की गम नई,
काजी हुआ तो क्या हुआ ।।
ज्ञानी जती से जगङो भलो,
अज्ञानी से क्या बोलना ।
कहे कबीर जो रहणी नही,
कहणी करे से क्या हुआ ।।
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