
मन रे गुरु वचनो में रहणो,
काम क्रोध री चोट ना लागे,
सत रे मार्ग वहणो,
भेद भरम ने छोड़ो आपणी,
संता आगे नमणो,
सत शब्दों री करो धारणा,
अज्ञान अंधारो हरणो,
गुरु जी रा वचन सत्य कर मानों,
हिरदै निशश्य करणो,
मैं तू का भेद मिटाओ,
सब घट आतम जाणो,
सोना रा जेवर न्यारा न्यारा,
है सब माही सोनो,
सत सोना री पारख करलो,
मिट जाए आणो जाणो,
गणपत राम गुरु कृपा किनी,
द्वेत नजर नहीं आणो,
पिरा राम की मेटी भ्रमना,
आनन्द माही समाणो,
गायक / प्रेषक – पोपटसिंह सिसोदिया।
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