
दरबार तेरा दरबारों में,
इक ख़ास एहमियत रखता है,
जा चीज उसे मिल जाती है,
जो लेने की नीयत रखता है,
माँ चिंतपूर्णी आए ने तेरे लाल नी माये,
ओ रहमत भवना ते बरसे कमाल नि माये,
माँ चिंतापुरनी आये ने तेरे लाल नि माये,
हर दिल दी तू भावना जाने जानी जान भवानी,
बसगर दे तेरा नगर हिमाला हे पर्वत दी रानी,
झंडे झुल्दे गुफा दे उते लाल नि माये,
नाम तेरे दी रोगन बनके जोगन बनके आई,
लांग सुपारी ध्वजा नारियल तेरी भेंट लै आई,
निमाने भगता ने पाई है थमाल नि माये,
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