
बरसे जी रंग बरसे जी
मंदिर का आंगन भीगे
ओ रंग बरसे जी।।
माता की करुणा बरसे
माता की करुणा छलके
भक्तो का भक्तो का
भक्तो का तन मन भीगे
हो रंग बरसे जी।।
पहला रंग रतन मुकुट का
मां सरस्वती की जय हो
उनकी हमपे उदारता बरसे
आशा का मधुबन भीगे
दूजा रंग स्वर्ण मुकुट का
महालक्ष्मी की जय हो
उनकी प्यारी शुभ ममता बरसे
प्राणों का उपवन भीगे
तीसरा रंग रजत मुकुट का
महाकालिका की जय हो
उनकी करुणा कृपालुता बरसे
जन जन का जीवन भीगे
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