
माता की शरण में आजा बावले शाणा ने छोड़
माता की शरण में आजा बावले,
शाणा ने छोड़।।
सबका टोटा दूर करे मां,
निंदा न जो दूर धरे जा,
रंक न राजा बनादे बावले,
बेरी गुडगावा और कटरे में,
माता रहती मन मेरे मैं,
मिनट में पार करादे भव त,
नवराता में जो बरती रहता,
सच्चे प्रेम त आरती पढ़ता,
मिले सुख वैभव की खान बावले,
‘नवदीप’ होजा नाम जगत में,
श्रद्धा और विश्वास रह मन में,
आठे का भोग लगाले बावले,
गायक / प्रेषक – नवदीप दराल।
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.





