
माता के टप्पे
दाता के, खुले गप्पे ॥
मैं, सुनाती हूं,
सुनो, भक्तों, माता के टप्पे ॥
गुण, मईया के, गा रही हूं ॥
इसका मैंने, लट पकड़ा,
इसे, अर्ज़ सुना रही हूं ॥
बागों, में, माली है ॥
जगमग, जोत जगा,
मेरी, रातें काली हैं ॥
तेरे, दर की, भिखारिन हूं ॥
बेड़ा मेरा, पार करो,
मैं तो, तेरी, पुजारिन हूं ॥
भक्तों, दिल न, डगमगाओ बैठें ॥
अंबे जग, जननी को,
देखें, दिल से न, भुला बैठें ॥
किए, कर्म अच्छेरे हैं ॥
वे नहीं, किसी से डरते,
जो, दास मां, तेरे हैं ॥
नित, तेरा ही, ध्यान करूं ॥
तेरे बिना, मां वैष्णो,
किस पर मैं, मान करूं ॥
माता, दिन हैं, बहारों के ॥
अवगुण, बख्श दो,
दाता, औगण हारों के ॥
मांग, यही तो, मांगी है ॥
जिन्होंने तेरा, दर छुआ,
किस्मत, उनकी अच्छी है ॥
माता, बारिश पड़ती, टीलों पर ॥
दुख सब, दूर होते,
एक, तेरे आने पर ॥
दाता, जल्दी जल्दी, आया करो ॥
अपने, बच्चों को,
आकर, दर्शन दिखाया करो ॥
एक, रंक और, एक राजा ॥
सब बुलाते हैं,
दाता, एक बार आजा ॥
तेरे, होते मां, बुरा हाल है ॥
तेरे बिना, मईया तेरा,
बच्चा, क्यों कंगाल है ॥
माता, बारिश पड़ती, खंभियों पर ॥
देवा रानी, कृपा करो,
परदेशी, बंदों पर ॥
जानी, जान, भवानी हैं ॥
शेर, सवारी करें,
मेरी, मईया, महारानी हैं ॥
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