
माता महादेवी है नाम,
विराजी दशरमन में,
सेवा में पंडा हज़ार,
माई की मढुलिया में,
आप विराजी सील में जाकर,
नगरी बसा दई नीचे आकर,
सेवा में सब नर नार,हए,
नीचे विराजे राम लला जी,
संग में उनके सीता माँ भी,
सेवा में हनुमत लाल,
नवराते में बोये जवारे,
द्वार तुम्हारे काली नाचे,
करते सब जय जयकार,
भक्तों तुम भी अरज लगा लो,
अपने बिगड़े काज सवारो,
बनते हर बिगड़े काज,
गायक / प्रेषक – उदय लकी सोनी।
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