
मात पिता और गुरू चरणों में,
दंडवत बारम्बार,
हम पर किया बडा़ उपकार,
ममता ज्ञान लुटाकर हम पर,
दिना जन्म सुधार,
तर्ज – देख तेरे संसार की हालत।
माता ने जो कष्ट उठाया,
कभी कर्ज न जाय चुकाया,
उंगली पकड कर चलना सिखाया,
ममता की दी शीतल छाया,
संस्कार लेकर जिनसे हम,
कहलाये हुशियार,
पिता ने हमको योग्य बनाया,
कमा कमा कर अन्न खिलाया,
पढा लिखा कर गुणवान बनाया,
जीवन पथ पर चलना सिखाया,
जोड़ जोड़ अपनी संपत्ति को,
बना दिया हकदार,
तत्व ज्ञान गुरू ने दर्शाया,
अंधकार को दूर भगाया,
हृदय में भक्ति दीप जलाकर,
प्रभु मिलन का मार्ग बताया,
जो भी उनकी शरण में जाता,
कर देवे उद्धार,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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