
मायूस हो के तेरे,
दरबार आ गया हूँ,
ठुकरा के आज झूठा,
संसार आ गया हूँ,
तर्ज – तेरे नाम का दीवाना।
मजबूरियों की कहानी हूँ मैं,
बर्बाद सी ज़िंदगानी हूँ मैं,
एक बेबसी का बनके,
साहूकार आ गया हूँ,
ठुकरा के आज सारा,
लब पे तड़प दिल में फरियाद है,
गुलशन उम्मीदों का बर्बाद है,
तुझको समझ के अपना,
एक बार आ गया हूँ,
सपने मिलन के सजाएँ हुए,
दर्शन खड़ा सर झुकाएँ हुए,
इस ज़िन्दगी से होकर,
लाचार आ गया हूँ,
स्वर – श्री चित्र विचित्र जी महाराज।
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