
मालवे मेवाड़ सु लाखु बिन्जारो है आयो जी
मालवे मेवाड़ सु लाखु,
बिन्जारो है आयो जी,
बालदडी मे काई माल,
लायो लाखु बिन्जारा ओ जी,
अरे घणी घणी खम्मा,
मारा इन्दुपति राजा ने,
परचो पुगो दुनिया रे माई,
ओ बाबा रामदेव ओ जी।।
अरे बडा तो विरमदेव ने,
छोटा रामदेव जी,
बालदडी रूकावे दोनो भाई,
कंवर अजमल रा ओ जी,
बालदडी रूकाय बाबा,
रामदेव जी पुचे ओ,
अरे झूठ बोलु तो माने,
राम री दुहाई जी,
भरीयो भरीयो खारो साम्बर,
लून बाबा रामदेव ओ जी,
अरे खारा खारा बोल लाखु,
थारे आडा आवे ओ,
मिसरी पलटे ने होई जो,
लून लाखु बिन्जारा ओ जी।।
अरे गाँव रूनीचे सु लाखु,
बालदडी ललकारी जी,
गयो गयो गाँव पनोदी माय,
लाखु बिन्जारा ओ जी,
अरे गाँव रे चोवटीये लाखु,
ठालो परोन किनोजी,
बालद खाडी गाँव पनोदी,
माई लाखु बिन्जारा ओ जी।।
अरे फलका करे बिन्जारी,
चूरमो बनादे जी,
धोबो भरने मिलरी मिलाय,
सुनले बिन्जारी ओ जी,
आज तो चूरमीयो माने,
खारो खारो लागे जी,
अरे धोबो भरने मिसरी भले गाल,
सुनले घरवाली ओ जी ।।
अरे खोल खोल कुनदी,
लाखु उल्टी रे किनी ओ,
ओ लून वाला ढिगला परा,
किना लाखु बिन्जारा ओ जी,
घणी घणी खम्मा मारा,
इन्दुपति राजा ने,
परचो पुगो दुनिया रे माय,
अरे बाणीया रो वेश धरने,
रामदेव जी आया ओ,
ओ गया गया गाँव पनोदी,
माई बाबा रामदेव ओ जी,
अरे दिनडो उगो ने लाखु,
वोपारीजी आया ओ,
करदे करदे मिसरी रो मोल,
अरे कपडा फटोडा सेठ,
मिसरी न लेवीजे ओ,
लाखु वाली मिसरी मूंगा मोल,
निर्धन बाणीया ओ जी,
अरे बिन्जारा रा बोल सुन,
झोली हाथ गाल्या ओ,
रूपीया वाला ढिगला परा,
किना बाबा रामदेव ओ जी,
अरे छोका छोका रूपीया लाखु,
गिन गिन लिजे ओ,
अरे खोटा खोटा पाचा कर दिजे,
अरे पाच गुन खोली लाखु,
पच्चीस गुन खोली ओ,
मिसरी पलटे ने होईगो लून,
अरे बिन्जारी भी रोवे लाखु,
बिन्जारो भी रोवे ओ,
टाबरिया रा काई रे हवाल,
बाबा रामदेव ओ जी।।
अरे रातरा ठगडा रा लाखु,
रात ठगवा आवे ओ,
धोले दिनरा ठगो ने किकर,
जावे लाखु बिन्जारा ओ जी,
हाथ मे हथकडीया लगावु,
मे पगा मे पग बेडी ओ,
अरे नोको नोको जेल खाना रे,
माय लाखु बिन्जारा ओ जी।।
अरे अलबाने पगे रे लाखु,
गाँव रूनीचे पुगो ओ,
हेलो मारीयो सरवरिया री पाल,
आधा रो वे मालवे में,
आधा फलोदी माय ओ,
बारह लाख रो बाबा थारे,
होम करावु ओ,
तेरह लाख मे रूनीचो जीमावु,
अरे बन्दी बन्दी कुनदी लाखु,
मिसरी रे वेला ओ,
खुली खुली लुन वाला,
ढिगला लाखु बिन्जारा ओ जी।।
अरे हरि रे चरना मे भाटी,
हरजी यु बोल्या ओ,
लून पलटाय किनी मिसरी,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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