
मिलादो शाम से ऊधो तेरा गुण हम भी गावेंगी हिंदी
मिलादो शाम से ऊधो तेरा गुण हम भी गावेंगी
मुकुट सिर मोर पंखन का मकर कुंडल हैं कानों में
मनोहर रूप मोहन का देख दिल को रिझावेंगी
हमन को छोड गिरधारी गये जबसे नहीं आये
चरण में शीश धरकरके फेर उनको मनावेंगी
प्रेम हमसे लगा करके बिसारा नंदनंदन ने
खता क्या हो गई हमसे अरज अपनी सुनावेंगी
कबी फिर आय गोकुल में हमें दर्शन दिलावेंगे
वो ब्रम्हानंद हम दिलसे नहीं उनको भुलावेंगी
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