
मुझको बाबा श्याम ने अपना बना लिया
मुझको बाबा श्याम ने अपना बना लिया,
क्या कहु मैं कैसे करू इनका शुक्रियां,
देखते ही देखते जीवन सवर गया,
एसा मैंने श्याम नाम प्याला है पीया,
हुआ बस दो ही मुलाकातों में अब तो मेरी डोर श्याम हाथो में,
मिले नैना मेरे श्याम सजनो से सारे गम दूर हुए जीवन से,
संवारे ने प्रेम का उपकार दे दिया,
हुई आसान मेरी राहे है हुकड़ी धुप ठंडी छाए है,
मेरे संग श्याम की पनाहे है,
इनकी बाहों में मेरी बाहे है,
संवारे ने इतना एहसान है किया,
जिसने भी श्याम की सचाई जान ली श्याम के प्रेमी की गहराई जान ली,
कहता चोखानी उसे श्याम है मिला उसका तो सुखा चमन गया खिल खिला,
भक्तो का सदा गीह्वान सांवरियां,
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