
मुझे आप ने बुलाया,
ये करम नहीं तो क्या है,
मेरा मर्तबा बढ़ाया,
तर्ज – मेरा आपकी कृपा से।
मैं गमो की धूप में जब,
तेरा नाम लेके निकला,
मिला रहमतो का साया,
मुझे जब भी गम ने घेरा,
मेरा साथ सबने छोडा,
तू ही मदद को आया,
कभी मौत के भवर से,
कभी मौजेपुर खतर से,
मेरी नाव को बचाया,
मैं भटक के रह गया था,
कही और बह गया था,
मुझे रास्ता दिखाया,
स्वर – श्री चित्र विचित्र महाराज जी।
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