
मेरा रखना सुखी परिवार सँवारे
चलने को मैं त्यार सँवारे,
मेरा रखना सुखी परिवार सँवारे,
इतना समय तो देदो कान्हा बेटी समजा दू,
पिता भाई का ध्यान तू रखना बस इतना बतला दू,
उस के कंधे पे तू थोड़ा भार सँवारे,
बेटे से कहना है इतना पढ़ लिख कर कुछ बनना,
बहिन ही तेरी माँ है अब से ये है तुझे समझना,
मौका इतना तो दे इक बार सँवारे,
पति से बस ये कह दू कान्हा भर दो मांग हमारी,
कही सुनी सब बिरसा देना भूल भी हो जो भारी,
इतनी विनती करो स्वीकार सँवारे,
ये न कान्हा के मोह नहीं मैं छोड़ रही हु,
सच तो ये है हरी मैं सब से नाते तोड़ रही हु,
ले चल मुझको तू अब अपने धाम सँवारे,
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