
मेरी खुल गई पटक देके अख नी
मेरी खुल गई पटक दे के अख नी,
गली दे विचो कौन लंगेया,
श्याम उते पेंदा मैनु शक नी,
जद पहुये ओहदे खड़ खड़ खड़के,
अख खुल गई मेरी पटक देनी तड़के,
तू बी वेख लै वारि दी कुंडी खोल नी,
साडे घर बोल्दा बनेरे उते काग नी,
शायद साडे ओह जगाऊंन आया भाग नी,
तू वि वेख ले बूहे दी चिक चिक नी,
ओहने पिंडे उते कमली पायी ऐ,
हथ मुरली मोदे ते कुर्ती पाई ऐ,
ओहदी मुरली करे धुन धुनी नी,
साडी गली अज श्याम फेरा पा गया,
कइयां दुखियां दे दुखड़े मिटा गया,
जांदी वारि मुहो बोलेया राधे राधे नी,
जेह्ड़े प्यार श्याम नाल पाऊंनगे,
हारावाले श्याम ओहदी विगड़ी बनाऊंगे,
कइयां दुखियां दे दुःख गया कट नी,
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