
मेरी मैंया अम्बे तुमको आसान नही है पाना,
आसान भी इतना है...
आसान भी इतना है के बस पर्दा हटाना,
ये भेद भी जो कुछ है अपना ही बनाया है,
ये पर्दा भी जो कुछ है अपना ही सजाया है,
अपने ही मन से मैने...
अपने ही मन से मैने जब दूर तुम्हे पाना,
सब रंग बदलते है सब रूप बदलते है,
ये तन भी बदलता है ये मन भी बदलता है,
पर तुम नही बदलती...
पर तुम नही बदलती आना ना कहीं जाना
ये भक्त चलते-चलते तेरे दर पे आ गया है,
ये राही चलते-चलते तेरे दर पे आ गया है,
ये द्वार आखरी है..
ये द्वार आखरी है, है आखरी ठिकाना,
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