
मेरी री सास के पांच पुतर थे लिरिक्स
मेरी री सास के पांच पुतर थे
दो देवर दो जेठ सुनियो
मेरी री करम में बावलिया लिख्या था
वो भी गया परदेस सुनियो
बारा री बरस में बावलिया घर आया
बरसे मुसलधारधार सुनियो
मेरा तो ल्याया घूम घाघरा
अपनी ल्याया पतलून सुनियो
सास भी सो गयी ससुरा भी सो गया
चुबारे बिछा लेई खाट सुनियो
मै भी सो गी बावलिया भी सो गया
घर में बड गए चोर सुनियो
मेरा तो ले गए घूम घाघरा
बावलिये की ले गए पतलून सुनियो
मै तो रोई सुबक सुबक कै
बावलिये ने मारी किलकार सुनियो
मन्ने तो जगाई अपनी देवोरानी जिठानी
बावलिये नै सारा गाम सुनियो
मेरी री सास के पांच पुतर थे हरयाणवी लोक गीत लिरिक्स
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