
जटाटवी गलज्जल प्रवाह पावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजंगतुंगमालिकाम्।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं
चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्॥
मेरी विनती सुनो जटाधारी,
मैं भी रावण सा तेरा पुजारी।
रावण से तेरे पुजारी,
भोले तेरी सूरत प्यारी।
तेरे भक्त भयंकर देख ज़रा,
सौ-सौ पे एक ही भारी।
भोले के भगत हम भोले हैं,
बढ़के तो आग के गोले हैं।
तेरे नाम का प्लाया पी पीकर,
हम बम बम बोले हैं।
तेरा भक्त बनूं मैं जनम जनम,
मेरा रक्त बड़ा है गरम गरम।
करूं ऐसे बाबा करम करम,
हर बार मिले मुझे हिंदू धर्म।
हम हिंदू पूरे कट्टर हैं,
भोले के शेर हम बब्बर हैं।
रे जय वीरू ना मान लियो,
हम तो शोले के गब्बर हैं।
हा हा हा हा।।
चढ़ा ऐसा नशा तेरे नाम का भोले,
हो रही मेरी आंखें हैं भारी।
गिर ना जाऊं कहीं, मेरा हाथ पकड़,
देखा तुझे मैंने मंदिर शिवालयों में,
तुझसे ही मेरी शुरुआत हो।
अब तो ये दिल चाहे पास तू आ जाए,
गंगा किनारे मुलाक़ात हो।
पास आओ मेरे, लग के तुझसे गले,
हल्का कर लूं मैं दिल अपना भारी।
मुझपे डालो नज़र, कैसे भेजूं ख़बर,
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