
मेरे कान्हा आ जाओ ना अंखिया नीर बहाए
मेरे कान्हा आ जाओ ना
अंखिया नीर बहाए, तुम बिन रह नहीं पाए
याद करो तुम काहना, वो बचपन की बाते
गोएं चराना, माखन चुराना, पनघट चीर चुराते,
हम को बहुत सताते,
मेरे काहना आ जाओ ना,
वो यमुना की लहरें, वो मधुबन की छैया
रास रचाना, बंसी बजाना, पल पल याद दिलाएं,
पल पल हम को सताएं...
जनम जनम की डोरी, तुम संग श्याम बंधी है
तुम संग काहना, रिश्ते हैं सारे, तुम संग हैं सारे नाते
फिर क्यूँ इतना सताते...
लौट के आजा तू गोकुल, याद बहुत तडपाए
रात ना निंदिया, दिन को ना चैना, नैनो को न हमरे आए
नयना नीर बहाए...
स्वर : अभिषेक चौरसिया
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