
मेरे घर गणपति जी है आए,
मैं अपने दुःख को हूँ बिसराये,
वो खुशियां अपने साथ है लाए,
मैं भोग लगाऊं उन्हें मोदक का,
मैं तिलक करूँ उनको चन्दन का,
मेरा मन हरपल यही गाए,
दयालु है वो है कृपालु,
उन्ही की महिमा गाए श्रद्धालु,
वो देखो मेरे घर है आए,
है ब्रम्हा जी भी उनको ध्याये,
नारद मुनि उनकी महिमा गाए,
वो जग के स्वामी अंतर्यामी,
निर्बल बल निर्धन धन है पाते,
वो सर्वप्रथम है पूजे जाते,
बड़ी सब महिमा उनकी गाए,
करूँ किस मन से मैं विसर्जन,
हे गजमुख मेरे गौरी नंदन,
फिर से पर्व ये जल्दी आए,
मैं अपने दुःख को,
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