
मेरे दीन दयाल नंदलाल हरि वृंदावन मोहे बुला लेना
मेरे दीन दयाल नंदलाल हरि,
वृंदावन मोहे बुला लेना,
मेरी आंख से पर्दा दुई का हटा,
चरणों में अपने जगह देना,
मेरे दीनदयाल नंदलाल हरि,
तर्ज – श्यामा आन बसों व्रंदावन में।
माया जाल की दुनिया में ऐसा फसा,
हरि नाम भी जपना भूल गया,
मेरी अंत में होगी क्या क्या दशा,
करुणा का हाथ बढ़ा देना,
तोहे छोड़ के किसकी आस करूँ,
तेरी नगरी में नित्य निवास करूँ,
दिन रात यही अरदास करूँ,
तेरी बंसी की धुन सुना देना,
ब्रज की बुहारी मैं करता रहूं,
तेरी सेवा पूजा मैं करता रहूं,
तेरे धो धो चरण मैं पीया ही करूं,
मेरी नाव को पार लगा,
बिरहाबस नयन कुचाय रहे,
रो रो कर नीर बहाए रहे,
बिन आए रहे अकुलाय रहे,
दुःख का कारण मिटा देना,
तेरे दरस के कारण मैं प्यासा,
सूरदास प्रभु की ये आशा,
मेरी आस की प्यास बुझा देना,
मेरा जीवन मरण छुड़ा देना,
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