
मेरे पास तुम रहो
मैं जब जहां जाऊं ।
तुम्हें साथ ही पाऊं ।
तुमसे अलग राधे
कैसे मैं रह पाऊं ?
मेरे पास तुम रहो
मेरे पास ही रहो
राधे मेरे पास तुम रहो
मेरी देह में, मेरे प्राण में
मेरी बांसुरी की तान में
तुम ही तो हो हर श्वास में
मन के अटल विश्वास में
हर क्षण तुम्हारा ही,
बस नाम दोहराऊं ।
तुम से अलग राधे,
जा रे जा रे
नटखट कृष्ण कन्हाई
काहे ओ रे कान्हा तूने मुरली
बजाई बजाई बजाई
जब ये मुरलिया बाजे
मनन का मयूरा नाचे
मुझसे रहा ना जाये
कोई जोर चल ना पाये
बनवारी सी मैं हो जाऊं
सांवरी सी तेरी सूरत पे
ओ रे कान्हा रे
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