
मेरे बांके बिहारी सांवरिया तेरा जलवा
है इधर तू ही तू, है उधर तू ही तू,
जिधर देखता हूं उधर तू ही तू,
मेरे बांके बिहारी सांवरिया,
तेरा जलवा कहां पर नहीं है,
आंखों वालों ने तुझको है देखा,
कान वालों ने तुझको सुना है,
तेरा दर्शन,,, उन्हीं को हुआ है,
जिनकी आंखों में पर्दा नहीं है,
लोग पीते हैं पी पी के गिरते,
हम पीते हैं गिरते नहीं हैं,
( जाम पर जाम पीने से क्या फायदा,
सुबह को पी शाम को उतर जाएगी,
मेरे नटवर की नैनो से पी के देख,
जिंदगी तेरी संवर जाएगी। )
हम तो पीते हैं सत्संग का प्याला,
कोई अंगूरी मदिरा नहीं है,
यह नशा जल्दी चढ़ता नहीं है,
चढ़ जाए तो उतरता नहीं है,
लोग पीते हैं दुनिया के डर से,
हमको दुनिया की परवाह नहीं है,
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