
मेरे बाबा को भी ग्यारस का इंतज़ार
मेरे बाबा को भी, ग्यारस का इंतजार रहता है,
वो श्याम धणी, भक्तों के लिए बेकरार रहता है...
सारी दुनिया कहती फिरती, बाबा एक सहारा...
आकर मुझे संभालो बाबा, मैं किस्मत का मारा...
मुझको बाबा, बस तुझ पे ऐतबार रहता है...
सुना है मैंने, करते हो तुम सबकी मुरादें पूरी...
अपने इस बेटे से फिर क्यूं, बना रखी है दूरी...
बाबा तेरे भरोसे, ये संसार रहता है...
मैं हूं निर्धन, मुझे बुलाने कोई जुगत लगाओ...
दूर तुम्हारा दर है बाबा, मुझको पास बुलाओ...
क्यूं लाल तेरा, तेरे होते लाचार रहता है...
मन करता है मेरा, कि मैं खाटू में बस जाऊं...
तेरे दर पे बैठ के बाबा, मीठे भजन सुनाऊं...
मेरे भरोसे, लेकिन इक परिवार रहता है...
रचनाकार
अमित अग्रवाल 'मीत'
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