
मेरे श्याम कोई बात छुपी नहीं तेरे से
मेरे श्याम कोई बात,
छुपी नहीं तेरे से,
मन की बाते पढ़ लेता तू,
क्या छुपाऊ तेरे से।।
तर्ज – दीनानाथ मेरी बात।
खाटू वाले श्याम,
तेरे दर पे मैं आया हूँ,
मन की सारी बाते,
जुबां तक लाया हूँ,
भूल मत जाना बाबा,
अपने इस भगत को,
सारी दुनिया छोड़ी मेने,
छोड़ा इस जगत को,
भगत हूँ मैं तेरा श्याम,
मुझको निभा लेना,
भव सागर में फसी नय्या,
पार लगा देना,
हारे का सहारा तू,
किश्ती का किनारा हैं,
जिसने भी पूजा,
तूने उसको उबारा है,
मुरली अधर पे,
लब तेरे चूमे है,
भक्त खड़े द्वार,
तेरी भक्ति में झूमे है,
खाली हाथ कैसे बाबा,
जाऊ तेरे दर से,
आस लेके निकला बाबा,
मैं तो अपने घर से,
खाते हो तुम खीर चूरमा,
लीले ऊपर घूमते हो,
अपने भक्तो को बाबा,
कभी नहीं भूलते हो,
भगतो की झोली बाबा,
भर दो अपनी भक्ति से,
संकट सारे दूर कर दो,
बाबा अपनी शक्ति से,
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